एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात

एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात जो मैं विगत 10 वर्षों से विभिन्न मंचों से कहता आ रहा हूँ आज फेसबुक के मित्रों से भी कहने का मन हो रहा है।
आजादी के समय की देश की जनसँख्या से अब तक 4 गुनी से अधिक की जनसँख्या हो गई है। उसी अनुपात में जिलों की संरचना से लेकर अब तक प्रशासनिक और भौगोलिक संरचनागत परिवर्तन होते रहे हैं और होते आएंगे भी। इनके फलस्वरूप बहुत से रोजगार और सरकारी नौकरियों में वृद्धि भी हुई है फलतः देश की सेवा के व्रत में लगे तमाम IAS IPS IRS IFS IES…केंद्रीय सेवाओं और राज्यों में भी राज्य स्तरीय PCS एवम् तर्कसंगत सेवाओं के लोगों को देश की सेवा करने का मौका मिल सका है।

लेकिन मैंने जिस बात को अपने अब तक के जीवन में बहुत ही गंभीरता से महसूस किया है वह है देश की सेवा में लगे MP और MLA के तनाव , ज्यादा कार्य के बोझ ,फलस्वरूप उनकी न केवल कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है बल्कि जनता की सेवा भी समुचित रूप से नहीं हो पा रही है जबकि सारा तंत्र ही इसी जनता और लोकतंत्र की रक्षा और पोषण के लिए रचा गया है। दूसरे जिस प्रकार देश की सेवा करने के लिए नित नए देश सेवकों की कतार इन दोनों क्षेत्रो में तैयार हो रही है उस अनुरूप सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में तो कोचिंग और पद की उपलब्धता के प्रतिवर्ष उपलब्ध मौकों की कोई कमी न होने से यह क्षेत्र तो संतुष्ट और ऊर्जा से भरा है। लेकिन राजनैतिक क्षेत्र में काम करते हुए देश की सेवा की इच्छा रखने वाले लोगों में जबरदस्त निराशा का भाव भी है।

एक तो आजादी के बाद भी संसद में 547 सांसदों की संख्या जो थी वही आज भी है। ये कम से कम 5000 होनी चाहिए थी लेकिन इसके लिए कोई हार्दिक पटेल नहीं खड़ा हुआ।
दूसरे इतने बड़े देश की विधानसभाओं में भी 25000 से अधिक विधायकों की जरूरत है जो 2025 तक 10000 सांसदों और 50000 विधायकों की मांग और पूर्ति तक बढ़ जानी चाहिए।
इसलिए खर्चो में कमी करके और दिल्ली में सभी बड़े सरकारी बंगलों को बहुमंजिली इमारतों में तब्दील करते हुए और संसद भवन को ख़ूबसूरती के दायरे से बाहर करते हुए 10000 सांसदों हेतु FAR बढ़ाते हुए बहुमंजिला विकसित कर देश सेवा के व्रत और हौसलों को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। हम ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की तर्ज पर सांसदों की सुविधाओं को सीमित कर सकते हैं। इस मामले में खर्चो को लेकर बहस और सारे सुझाव मान्य हैं पर सीटें न बढ़ाने को लेकर कोई सुझाव मान्य नहीं होगा।

इसी तरह छोटे राज्यों की जरूरत को लेकर बहुत से तर्क हैं जबकि नए राज्य का खर्चा ज्यादा है। यहाँ भी विधानसभा की सीटें बढ़नी चाहिए। UP में तो 3000 विधायकों की जरूरत है।
अब सीटों को बढाने की जबरदस्त आवश्यकता है।
खर्चो की समस्या पर निपट लिया जायेगा।
आखिर ये सब हम जनता के लिए ही तो कर रहे हैं। जब 10000 मरीजों के लिए 5 डॉक्टर पर्याप्त नहीं हैं तो इस देश की सेवा में इतने कम जनसेवक क्यों ?
प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री अथवा प्रधान जनसेवक के मुद्दे पर फिर कभी ,अभी इसको सुधारिये।

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