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Who are we?
Energy needs!
Who are we?
दुनिया मे जैसा बहुत पहले होता था वैसा या तो अब हो रहा है या जैसा आज हो रहा था आगे वैसा का वैसा नहीं रहने वाला है।
बढ़ती जनसंख्या और पर्यावरण की चुनौतियों ने हमें झकझोर कर रख दिया है।
मनुष्य का जीवन आगे कैसा होगा?
सभी उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग कैसे करना होगा ?
शिक्षा , कृषि, व्यवसाय, तकनीक, ऊर्जा, भोजन, मनोरंजन, परिवार, समाज, देश, विश्व में मानव संबधो के दृष्टिकोण के परिवर्तनों सहित जीवन की क्या दिशा होगी ?
जीव, जन्तु सहित समुद्रों व अंतरिक्ष जगत के साथ हम अपने रिश्तों में क्या और कैसी दूरियां तय करेंगे……
इन सभी के बारे में सरल, सहज, स्पष्ट ज्ञान, दर्शन, कांसेप्ट , अवधारणा, खोज, उपाय सहित विविध मार्गी उपायों की उपलब्धता का एक ऐसा प्लेटफॉर्म जिसको अनपढ़ से लेकर दुनिया के टॉप 500 विश्वविद्यालय तक सभी बिना किसी उहापोह या किंतु परंतु के साथ अपने को सहजता से जोड़ पाएं ऐसा मंच
रॉय बहादुर फाउंडेशन के रूप में निखर कर आएगा।
इसके अंतर्गत
नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन के तहत कार्य कर रहे पूरी दुनिया के सभी संगठनों का एक अम्ब्रेला नेटवर्क इसके अंतर्गत होगा जो जरूरतमंदों को इन संगठनों तक सीधा ट्रैफिक डायवर्जन प्लेटफॉर्म देगा।
पूरी दुनिया मे अपने अपने देशों में विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्य करके चर्चित, पुरस्कृत, सक्रिय अथवा किन्ही कारणों से निष्क्रिय ऐसे सभी उपकारी लोगो को जोड़कर सतत विकास व ज्ञान के अप्रतिम प्रसार का भी सीधा नेटवर्क प्लेटफॉर्म का विकास का पुश बैक इंजन की भूमिका ये अपना रॉय बहादुर फाउंडेशन
निभाएगा।
इसी तरह से कृषि क्षेत्र में पुराने परंपरागत बीजों के संरक्षण, उनके स्थानीयता के हिसाब से उनका रखरखाव व संवर्धन, स्थानीयता व प्राकृतिक विशेषता के आधार पर उनके विकास को गति देने के लिए ये फाउंडेशन महत्वपूर्ण भूमिका दुनियाभर के कृषकों, कृषि विशेषज्ञों, कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों , कृषकों व उपभोक्ताओं को साथ लेकर निभाएगा।
जीवन जीने के लिए क्या और किसी शिक्षा होनी चाहिए ?
प्राथमिक पाठ्यक्रमों के सिलेबस तैयार करने से लेकर पूरी दुनिया की स्थानीय व समग्र दोनों जरूरतों के लिए बिना किसी कॉन्फ्लिक्ट के प्राथमिक से लेकर रिसर्च तक के पाठ्यक्रमों के बारे में ऐसी अवधारणा व मेथड पर विचार करना जो सम्पूर्ण विश्व के लिए एक दंभरहित ज्ञान के ऐसे प्रारूप का निर्माण इस रॉय बहादुर फाउंडेशन के अहम कार्यो में से एक होगा।
ऐसा ज्ञान क्या सभी मनुष्यों के लिए पर्याप्त जीविकोपार्जन के लिए उपयोगी हो पायेगा…..
बेकारी, बेरोजगारी की भयंकरता और क्रूरता आज के विकास के द्वंद का नतीजा है।
हम शुरू से आज तक बेहतर जीवन आधार पर ही सोचते रहेंगे या मानव विकास के कभी उस अवस्था पर भी पहुंच पायेगा जहाँ पर जीविकोपार्जन की समस्या बहुत ही सतही बातें हों…
लोग, रोजगार, विकास, ज्ञान, पैमाने व मनुष्य की विकास यात्रा का वितान क्या हो इस प्रश्न और इसके उत्तर को साधना रॉय बहादुर फाउंडेशन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी जिसके समाधान का मॉडल इसी को प्रस्तुत करना है।
तकनीक किस तरह से रोजगार को परिवर्तित करेगी ..
तकनीक किस तरह से हमारे मनोरंजन, सोच, संबंधों , रिसर्च, हार्मोन, इलाज, स्वास्थ्य, चेतना आदि को प्रभावित करेगी इन सबको भी इसी चश्मे से देखकर उसका अध्ययन व समाधान रॉय बहादुर फाउंडेशन के कार्य का अंग होगा।
संसाधनों के लिए समुद्रों, अंतरिक्ष , वातावरण सहित विभिन्न जगहों पर हमारा क्या रुख होगा इसकी तैयारी सहित हमारी वर्तमान तैयारी और पूरी पृथ्वी में हो रहे विभिन्न देशों के सम्पूर्ण रक्षा खर्च जिसमे हम केवल आस पास के पड़ोसी देशों या दुनिया के मध्य अपनी सैन्य निर्भरता व सामरिक सोच के तहत ही केवल अपनी तैयारी देख पा रहे हैं के मुकाबले अंतरिक्ष मे किसी अन्य दुनिया/देश की सैन्य तैयारियों जिनका की हमे कोई अंदाजा नही है के सापेक्ष हमारी तैयारी क्या हो इसपर भी फाउंडेशन कार्य करेगा व वर्तमान उपलब्ध सैन्य खर्च को क्या किसी ऐसे प्रारूप में बदला जा सकता है जो शांतिकाल में प्रगति पा परोपकार का कार्य कर सके ?
तमाम ऐसी बातों को लेकर रॉय बहादुर फाउंडेशन हर उस व्यक्ति, संस्था या सिस्टम की रेटिंग तय करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने का कार्य करेगा जो किसी न किसी कारण से छूट गए हैं या छूट जाया करते हैं।
Energy needs!
विश्व की ऊर्जा जरूरतें किस तरह से आकर लेंगी ?
सोलर पॉवर, हाइड्रोजन गैस, समुद्र की लहरों, हलचलों, जमीन के भीतर की संचित ऊर्जा के उपयोग उनके रूपांतरण, सोलर सहित विभिन्न ऊर्जा के स्रोतों से लंबे समय तक ऊर्जा संचित रहकर काम करने वाली बैटरी, स्वतः अपने को चार्ज कर सकने वाले उपकरण, कार सहित आवागमन के विभिन्न मॉडलों पर क्या और कैसा परिवर्तन आएगा ये हमारी घरती को कितना उपयोगी होगा ये अध्ययन व मॉडल कैसे डेवेलोप हो इसकी भी चिंता फाउंडेशन को करनी है।
इसी कड़ी में सामाजिक ताना बाना, मानव मानव के मध्य रिश्ते इन बदलती तकनीक और कम होते जा रहे आपसी मेल जोल के दौरान किस तरह से अपने मौलिक स्वरूप में बचे व बने रहें इस चुनौती को , रिश्तों की गर्माहट को , प्रजनन सहित सेक्स की आवश्यकता व उसकी प्रासंगिकता को मानव समाज कैसे और किस शेप में उसी ऊष्मा से बचाये रख पायेगा इस चुनौती को भी फाउंडेशन अपने एजेंडे में रखेगा।
इसके लिए जरूरी सांस्कृतिक, मौलिक व कलात्मक गतिविधियों
कथा, कहानी, सर्जनात्मक लेखन, लेखकों के दुनियाभर के संगठनों , फ़िल्म मेकर्स, अभिनेता/ अभिनेत्रियों, गीतकारों और नाना प्रकार के कलाकारों के साथ विभिन्न विधाओं में जुड़े रहकर नित नित नए रूपक व प्रतिमान गढ़ने होंगे जिनसे हमारा ये 8 अरब के करीब का मानव संसार न केवल अपने मौलिकता , सर्जनात्मकता व जीवन के चुहल को बनाये व बचाये रखने में सफल हो पाए बल्कि जीवन मे अवसाद व बोरियत की किसी भी महामारी से उसका कोई साबका ही न पड़े !
तकनीकी प्रगति मानव के समस्त जीनों को डिकोड करके किस तरह से मानव शरीर की क्षमता वृद्धि करने वाली है और स्टेम सेल टेकनीक आने वाले समय मे बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में कितना क्रांतिकारी परिवर्तन ला पाएगी ये एक व्यापक कदम भविष्य में रहने वाला है।
फाउंडेशन योग, भोजन के पोषण, आयुर्वेद व जीवन पद्धति के साथ साथ व्यायाम व फिटनेस के आधारभूत ढांचे को बेहतर करते हुए इनकी 100% सुलभता पर लगातार काम करते हुए बेहतर कार्य करेगा।