नीति आयोग का अवसर

नीति आयोग के लिए इस आपदा में एक बेहतरीन कार्य को करने का अवसर है….
बस डॉक्टर विनोद पाल जी को बिना डिस्टर्ब किये क्योंकि वो COVID के नियंत्रण व उससे बचाव के लिए जूझ रहे हैं… बाकी के अन्य एक्सपर्ट क्या कोई ऐसा अध्ययन या रिपोर्ट तैयार कर सकते है कि भारत को WHO, वैश्विक पैमानों के स्वास्थ्य, रहन-सहन, शोध, रोजगार, अन्य बुनियादी जरूरतों व विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों का ऐसा ढांचा खड़ा करने में कितना समय लगेगा जिससे लोग हॉवर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज , MIT, जॉन होपकिन्स आदि संस्थानों में जाना ठुकराकर भारत मे रहने, पढ़ने व नौकरी हेतु आ सकें ?
वर्तमान समय मे इस लक्ष्य को प्राप्त किये जाने में क्या कठिनाई आ रही है ?
इस हेतु बनी योजना में नीति आयोग अपने जनवरी 2015 के गठन से लेकर आज तक कितनी प्रगति देख सका है ?
इस कार्य मे क्या क्या बाधाएं आई है ?
इसमें संसाधनों की कोई कमी तो नही आड़े आ रही है ?
क्या भारत की जनसंख्या इस प्रगति के लिए कोई बहुत बड़ी बाधा है ?
यदि हाँ तो इस बाधा से पार पाने , इसके नियंत्रण और इन सबके बाद भी उपरोक्त लक्ष्य को कैसे पाया जाए क्या इसके लिए कोई नीति , ‘नीति आयोग’ द्वारा बनाई गई है ?
या बनाई जा रही है ?
ये कार्य इस वर्ष करके नीति आयोग भारत का बहुत भला कर सकता है और पूर्व के योजना आयोग को अपने इन 6 वर्षों के हाहाकारी विद्वता के दांव से उसके अकर्मण्यता का आईना भी दिखा सकता है !
हम नीति और क्रियान्वयन दोनों के इंतजार में हैं !
सादर !

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