Officer arrested in bribery is now DGP: Sikkim सरकार ने क्यों एक दागी अफसर को बनाया DGP?

Officer arrested in bribery is now DGP: सिक्किम में आज पुलिस विभाग में बड़े बदलाव हुए हैं और राज्य के पुलिस महानिदेशक एन.के. मिश्रा रिटायर हो गए हैं। वहीं आज ए. सुधाकर राव को राज्य के पुलिस विभाग का एडिशनल चार्ज दिया गया है। लेकिन दिलचस्प ये है कि जिस ए. सुधाकर राव को राज्य में डीजीपी का एडिशनल चार्ज दिया गया है, उसे सीबीआई रिश्वत लेते गिरफ्तार कर चुकी है और वह राज्य के दागी अफसर माने जाते हैं। लिहाजा राज्य सरकार द्वारा उन्हें एडिशनल चार्ज दिए जाने के बाद मामला चर्चा में है और राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसा लगता है कि सिक्किम सरकार ए. सुधाकर राव को राज्य का डीजीपी बनाने की तैयारी में है, क्योंकि राज्य सरकार ने यूपीएससी में जो पैनल भेजा हैं, उसमें राव का भी नाम शामिल है। जबकि डीजीपी जैसे अहम पदों पर नियुक्ति के लिए गृहमंत्रालय और सीवीसी समेत कई केन्द्रीय एजेंसियों से क्लीयरेंस मिलनी जरूरी होती

असल में राज्य के डीजीपी एनके मिश्रा 1988 बैच के आईपीएस हैं और आज वह रिटायर हो गए हैं। राज्य सरकार उनके रिटायर होने से पहले किसी आईपीएस अफसर को राज्य का डीजीपी नियुक्त नहीं कर सकी है। जबकि नियमों के मुताबिक राज्य सरकार को डीजीपी के रिटायरमेंट के पहले ही नया डीजीपी नियुक्त करना चाहिए था। जानकारी के मुताबिक सरकार ने यूपीएससी में जिन तीन आईपीएस अफसरों का पैनल भेजा है और उसमें भी राव का नाम शामिल है। लिहाजा राज्य सरकार की राव पर मेहरबानी की समझा जा सकता है, क्योंकि राव के खिलाफ सीबीआई में मामला पहले से ही चला रहा है और डीजीपी जैसे अहम पदों पर नियुक्ति के लिए अफसर को कई एजेंसियों से क्लीन चिट लेनी होती है। वहीं क्लीन चिट मिलने के बाद राज्य और केन्द्र सरकार डीजीपी की नियुक्ति की अनुमति देती है। लेकिन राव के मामले में तो मामला दूसरा ही है, क्योंकि राव को भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है। उनके बावजूद ए सुधाकर राव को राज्य का नया कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया है। असल में सुधाकर पहले से ही दागी अफसर रहे हैं और राज्य में पुलिस विभाग के मुखिया का एडिशनल चार्ज देने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जा चुके हैं राव

असल में सिकिक्म कैडर के आईपीएस ए. सुधाकर राव अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश (अविविभाजित) में सीबीआई में डेपुटेशन में थे और इस दौरान सीबीआई की दिल्ली की टीम ने उन्हें रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने राव के घर पर भी दबिश दी थी और वहां से नगदी समेत ज्वैलरी मिली थी। सीबीआई ने उन्हें एक मामले में जमानत देने के लिए एक बीमा अधिकारी से 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, इस मामले में सीबीआई को राव के खिलाफ शिकायतें मिली थी और उसके बाद सीबीआई जाल बिछाकर उन्हें गिरफ्तार किया था

राव को दिल्ली की टीम ने किया था गिरफ्तार

ए. सुधाकर राव के खिलाफ सीबीआई मुख्यालय में शिकायत मिलने के बाद डीआईजी सुदीप प्रताप सिंह के नेतृत्व में दिल्ली के 15 सीबीआई के अफसरों की टीम बनाई गई और जिन्होंने विशाखापत्तनम में राव और दो अन्य आरोपियों के घरों पर छापेमारी की थी और वहां से राव के घर से 7.5 लाख रुपये नकद, 3 लाख रुपये के आभूषण और 2.5 लाख रुपये के एफडी के साथ ही एक घर, तीन फ्लैट और तीन भूखंड के दस्तावेज मिले थे, वहीं सीबीआई ने गिरफ्तार कर उन्हें अदालत में पेश किया था और सीबीआई हिरासत में भेज दिया गया

मोदी सरकार का 360 डिग्री का फार्मूला हुआ फेल

बहरहाल, एक सुधाकर राव को एडिशनल डीजीपी का चार्ज देने और यूपीएससी में उनका नाम भेज दिया है। असल में केन्द्र सरकार ने अफसरों की नियुक्ति में पारदर्शियता बरतने और दागी अफसरों को अहम पदों में नियुक्त ना करने के लिए 360 फार्मूले की शुरुआत की थी। लेकिन ए. सुधाकर के मामले में सभी नियम और फार्मूले दरकिनार किए गए हैं। राज्य सरकार ने ए. सुधाकर राव का नाम यूपीएससी में भेजा है। जबकि उनके खिलाफ चल रही जांच गृहमंत्रालय और सीबीआई के पास विचाराधीन है। इसके साथ ही एक और सवाल उठ रहा कि क्या ए. सुधाकर राव को गृहमंत्रालय, सीबीआई और सीवीसी ने क्लीन चिट दी गई है?

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